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UFO UFO से हम पर नजर रखते हैं एलियंस! दूसरे ग्रहों की सदियों पुरानी सभ्यता पर अमेरिकी एक्सपर्ट ने कही ये बात

अमेरिकी UFO एक्सपर्ट का मानना है कि उड़न तश्तरियां या UFO समझते हैं, दरअसल Aliens के Drone हैं, जिससे वे हम पर नजर रखते हैं.   Share:     Written By: ज़ी न्यूज़ डेस्क Updated: Aug 4, 2021, 09:31 AM IST खास बातें UFO एलियंस की artificial intelligence से बने हुए ड्रोन. एलियंस इनके जरिए धरती पर नजर रखते हैं. दूसरे ग्रहों की सभ्यता काफी पुरानी.   नई दिल्ली:  यूएफओ (UFO) को लेकर वैज्ञानिक अलग-अलग तरह के खुलासे करते रहे हैं. इसी कड़ी में पेंटागन की यूएफओ (UFO) रिपोर्ट के बाद अब हार्वर्ड के प्रोफेसर Avi Loeb का दावा है कि यूएफओ (UFO) दरअसल एलियंस के ड्रोन हैं. सदियों पहले की सभ्यताएं ब्रह्मांड में मौजूद  प्रोफेसर Avi Loeb का कहना है कि धरती की सभ्यता से भी सदियों पहले की सभ्यताएं ब्रह्मांड में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि दूसरे ग्रहों की सभ्यता हमसे काफी पुरानी है और UFO दरअसल उनके ड्रोन्स हैं, जिनके जरिए वो हम पर नजर रखते हैं और हम इन ड्रोन्स को UFO समझते हैं.  UFO से   धरती पर नजर रखते हैं एलियंस  'द सन' की रिपोर्ट के मुताबिक, Harvard के प्रोफेसर और UFO एक्सपर्ट Avi Loeb ने कहा कि UFO
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Indian American scientist spots genes that fight Covid infection

  A team of US scientists, led by an Indian-origin researcher, has identified a set of human genes that fight SARS-CoV-2 infection, the virus that causes Covid-19. According to Sumit K. Chanda, professor and director of the Immunity and Pathogenesis Programme at Sanford Burnham Prebys Medical Discovery Institute, the scientists have gained new insights into how the virus exploits the human cells it invades. "We are still searching for its Achille's Heel so that we can develop optimal antivirals," Chanda said in a paper published in the journal Molecular Cell. Knowing which genes help control viral infection can greatly assist researchers' understanding of factors that affect disease severity and also suggest possible therapeutic options. The genes in question are related to interferons, the body's frontline virus fighters. Soon after the start of the  pandemic , clinicians found that a weak interferon response to SARS-CoV-2 infection resulted in some of the more s

भौतिक चिकित्सा की माहिर डॉ.प्रिया गुप्ता (फिजियोथेरपिस्ट):

   भौतिक चिकित्सा की माहिर डॉ.प्रिया गुप्ता (फिजियोथेरपिस्ट):                                                      This buddying physio  introduces herself thus - Been in this service from the start of my studies (Bachelor of Physiotherapy )that has been about 4-5 years in the field be it studies or practice . As a health care professional and a young physio i just hope and wish for the betterment of human health and new developments to ensure that it is possible . Did my B.P.T from Amity Institute of Physiotherapy (Noida ). She is as simple and spontaneous person as her profile and is very respectful towards her patients and is a good service provider par excellence . With a clear vision she weaves her future.I wish her success and bless him from the core of my heart and pray krishna to help this little Narayani for her vertical growth. Hare Krishna ! भौतिक चिकित्सा की माहिर डॉ.प्रिया गुप्ता (फिजियोथेरपिस्ट )                                                                             

हमारा मानना इस मर्तबा भी अप्रत्याशित कुछ भी नहीं होगा ,मात्र कयास होता है -ऐसा ऐसा भी हो सकता है ,स्टेटिस्टिकल फिनोमिना की प्रायिकता तो व्यक्त की जाती है सुनिश्चित यहां कुछ नहीं होता है -प्रेक्षणीय विज्ञान की अपनी सीमाएं हैं कुदरत के अपने खेल है। खगोल विज्ञान एक ऑब्ज़र्वेशनल साइंस है। प्रेक्षण सौ फीसद शुद्ध नहीं हो पाता ,प्रेक्षण तामझाम ही विक्षोभ पैदा करने की क्षमता रहते हैं।

View all नासा का दावा -चार दिन बाद पृथ्वी से टकरा सकता है एस्टेरोइड ५०,००० किलोमीटर प्रति घंटे है रफ़्तार   साल 2020 कई बड़ी घटनाओं के लिए याद किया जाएगा। इस साल की शुरूआत में कोरोना महामारी आई, जिसकी वजह से लाखों लोगों की जान अब तक जा चुकी है। वहीं दो-तीन बड़े एस्टेरॉयड भी पृथ्वी के पास से गुजर चुके हैं। जिनको लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई थी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। अब फिर एक बड़ा एस्टेरॉयड तेजी से धरती की ओर आ रहा है। जिसकी पृथ्वी से दूरी को लेकर वैज्ञानिक परेशान हैं। 6 सितंबर को टकराने की आशंका नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक ये एस्टेरॉयड भारतीय समयानुसार 6 सितंबर को दोपहर 3.30 बजे धरती के वायुमंडल से टकरा सकता है। नासा ने इसका वैज्ञानिक नाम 465824 (2010FR) रखा है, जबकि आमभाषा में इसे अपोलो एस्टेरॉयड कहा जा रहा है। 2010 में इसकी खोज वैज्ञानिकों ने कर ली थी, जिसके अब धरती से टकराने की आशंका है। इसका आकार गीजा के पिरामिड से दोगुना बड़ा बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मत अलग वहीं दूसरी ओर सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्जेक्टस (CNEOS) के वैज्ञानिकों क